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खत्म हुआ मतदान का दौर

लगभग एक माह तक पूरी तरह से थका देने वाला लोक सभा चुनाव का कार्यक्रम अब समाप्त हो गया। चुनाव आयोग के अनुसार चुनाव शांतिपूर्ण हुए जबकि नक्सल प्रभावित इलाकों में कुछेक हिंसा की वारदातें हुई जिसमे कई लोग मारे गए। भारत के चुनावी इतिहास के पन्ने को अगर पलट कर देखा जाए तो एक बात गौर करने वाली है की भारत में दिनोदिन चुनावों में हो रही हिंसा में कमी आई है जोकि एक लोकतान्त्रिक देश के लिए काफी बेहतर है। एक बात और ध्यान देने वाली है की इस चुनाव प्रक्रिया में उन वर्गों की भागीदारी में भी वृद्धि देखी गई है जो पहले के चुनाव में हाशिए पर रहा करते थे। इस वृद्धि के लिए चुनाव आयोग की सक्रियता आख़िर सफल हुई और इसका श्रेय भी काफी हद तक चुनाव आयो़ग को जाता है। इस चुनाव में उन राजनैतिक संगठनों और ताकतों का भी इसमें सकारात्मक योगदान है, जिन्होंने पिछडों, दलितों व स्त्रियों को लोकतंत्र में ज्यादा महत्वपूर्ण व सक्रिय बनाया है। इससे साफ़ जाहिर होता है की हमारा देश लोकतान्त्रिक व्यवस्था को बेहतर और प्रभावशाली बनाने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रही है। लेकिन इसके बावजूद भी इस चुनाव में कुछ कमिया और सवाल देखे जा सकते ह...

तीसरे मोर्चे की वास्तविकता : स्वप्न, हकीकत या छलावा

१५वीं लोकसभा चुनाव की तिथि निर्धारित होते ही तीसरे मोर्चे के गठन का भी ऐलान कर दिया गया। तीसरे मोर्चे के लिए चलाया जा रहा अभियान गति पकड़ रहा है। तीसरे मोर्चे का सपना कोई नया नही है। एक विचार के तौर पर यह स्थापना जनता को काफ़ी आकर्षित भी करती है की देश में एक ऐसा मंच बने जो उन सभी मुश्किलों से मुक्त हो जिसके लिए कांग्रेस पूरे देश में जानी जाती है। और साथ ही भाजपा की तरह संघ और साम्प्रदायिकता की कोई छाया भी न पड़े। कांग्रेस और भाजपा देश की राजनीति की दो ऎसी हकीक़त है जिसके आस-पास ही पिछले कुछ वर्षो से भारतीय राजनीति ध्रुवीकरण है। तीसरे मोर्चे की कल्पना इन दोनों से अलग एक सुनहरा व सुव्यवस्थित देश बनाने की है। लेकिन जाहिर सी बात है की इसके लिए जो भी महारथी आयेंगे वो भी किसी स्वर्ग से नही बल्कि इन दोनों ध्रुवों के आस-पास घूमने वाले महारथी ही होंगे जो दिल्ली की सत्ता में अपनी हिस्सेदारी या अपने जुगाड़ तलाश रहे होंगे। इसमें बहुत से ऐसे भी होंगे समय के नजाकत को देखते हुए पाला भी पलट सकते है।

जन्मदिन एक दिवस अनेक

उत्तर प्रदेश में आज का दिन काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योकि आज बहुजन समाज पार्टी की अध्यछ व उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का ५३वाजन्मदिन जो है जिसे कई मायनो में याद रखा जाएगा। पिछले कई महीनो से बहन मायावती के जन्मदिन की तैयारिया चल रही थी। जबकि पार्टी के अन्य नेता का कहना है की इस बार मुंबई में हुए आतंकी हमलो की वज़ह से बहन जी अपना जन्मदिन बड़े ही सादगी से मनाएगी। मायावती प्रत्येक वर्ष अपना जन्मदिन बड़े धूम धाम से मनाती है लेकिन इस बार माहौल जरा हट के था। प्रत्येक वर्ष बहन जी के जन्मदिन अवसर पर उनके पार्टी के कार्यकर्ता व तमाम प्रतिष्ठित लोग शामिल होते है। लेकिन इस बार उनका जन्मदिन मनाने वालों में उनके समर्थकों के साथ उनके विरोधी पार्टी वाले भी शामिल थे। हा, ये बात अलग है की उनका जन्मदिन मनाने का अंदाज़ अलग था। विरोधियो को तो एक मौका चाहिए चाहे वो जन्मदिन का अवसर हो या कोई और मौका। किसी ने ये मौका गवाया नही। और इसी का फायदा उठा कर विपछी दलों ने प्रदेश में जगह जगह जम कर बवाल काटा। विपछी दलों का आरोप है की बहन जी अधिकारियो, ठेकेदारों, दुकानदारों व आम जनता से पार्टी के नाम पर जबरन चंदा वस...